माँ: ममता, शक्ति और जीवन का आधार
माँ -जो लिखते ,सोचते, ऐसा एहसास ---
"जिसे शब्दों में बयान करना
भगवान के लिए भी मुश्किल होगा "
माँ का संधि-विच्छेद ,सामान्य रूप से नहीं किया जा सकता।
म--ममता की मिटटी ,
आ से आशीष का आकाश
और इन दोनों में सांस की कोमलता (चन्द्रबिन्दु)
घुलती है तब बनता है" माँ"। ....
माँ---- तू ज्ञान है, तू ध्यान है,
तू अम्बर सी महान है।
तू मोल है, अनमोल है,
तू शांत भी... तू ही बोल है।
तू आरम्भ है तू अनंत है
तू ज़िन्दगी का स्तम्भ है ....
तू राज है.... तू विस्तार है
तू ही तो जीवन का आधार है।
"माँ "...शब्द छोटा है ,अर्थ असीम है
इस एक शब्द में पूरा संसार समाया है।
जब कोई बच्चा पहली बार माँ कहता है,
तो लगता है जैसे दुनिया की सबसे पवित्र ध्वनि
धरती पर उत्तर आयी हो।
तू वह शक्ति है ,
जो बिना कहे समझ जाती है
तू वह दृष्टि है, जो बिना कहे ,सब दिल से देखती है ko
तू ज्ञान है ,क्युकी जीवन के सब से बड़े पाठ
किताबों से नहीं ,तेरी गोद से मिलते है.
तू ध्यान है क्यों की जब सारी दुनिया शोर करती है ,
तब तेरी एक थपकी मन को शांत कर देती है।
तू अम्बर सी महान है।
क्यों की ाक्ष की तरह तू अपने अंदर सब कुछ समेट लेती है।
न शिकायत न हिसाब,... बस प्रेम का अनंत विस्तार।
तू अनत अनमोल है,
तेरे प्यार की कीमत ना लगाई जा सकती है,
ना ही चुकाई जा सकती है.
जब बच्चा गिरता है तो सब से पहले जो हाथ उसे उठाते है वो ट्रे ही होते है।
जब वह रोता है,
सब से पहले जो दिल बेचैन होता है ,
वो तेरा ही होता है।
और जब वह मुस्कुराता है,
तो सबसे पहले जो आँखे चमकती है वो तेरी ही तो होती है
तू शांत है जैसे सुबह की पहली किरण,
और तू ही बोल है,
जब सच कहने की हिम्मत चाहिए होती है।
तू आरम्भ है---
क्यों की हर नयी राह
सब से पहले तेरा ही आशीर्वाद होता है।
तू अंत है....
क्यों की हर थकान के बाद
आखरी सहारा तेरी गोद ही होती है।
तू जीवन का स्तम्भ है--
जिस पर पूरा परिवार टिका होता है।
घर की दीवारें
ईंट और पतथर से बनती है।
पर घर की आत्मा
तेरे होने से बनती है।
तेरी रसोई की खुश्बू ,
तेरी आवाज़ की पुकार,
तेरे हाथों की गर्माहट --
यही वह चीज़े है जो किसी घर को घर बनाती है,
माँ --
तू राज है..
तेर मन में कितनी चिंताए होती है कितने सपने होते है,
कितनी थकान होती है,
पर तू सब को मुस्कान में छुपा लेती है।
और तू विस्तार है,
क्यों की तेरी ममता कभी सीमाओं में नहीं बंधती।
एक माँ का दिल सिर्फ अपने बच्चे के लिए ही नहीं,
कभी कभी पुरे संसार के लिए
धड़कता है।
जब बच्चा छोटा होता है माँ उसकी दुनिया होती है
और जब वह बड़ा हो जाता है तो माँ उसकी दुनिया के पीछे
कड़ी एक अदृश्य शक्ति बन जाती है।
माँ... तू ही वह छाँव है जिसमे
धूप भी ठंडी लगती है।
तू वह नदी जिसकी धारा कभी सूखती नहीं है।
तू वह दीप ह
जो खुद जलकर दूसरों को रौशनी देता है।
तू वह प्रार्थना है
जो बिना शब्दों के भी
भगवन तक पहुंच जाती है
तेर हाथों की लकीरों में सिर्फ किस्मत नहीं
पुरे परिवार का भविष्य लिखा होता है।
तेरी आँखों में
सिर्फ आंसू नहीं ,
आशीर्वाद की पूरी दुनिया बस्ती है।
और तेरे दिल में सिर्फ प्रेम नहीं
बल्कि वह शक्ति होती है
जो टूटे हुए मन को
फिर से जीना सीखा देती है।
माँ.. तू सच में एक रहस्य है।
तू त्याग है तू तपस्या है,
तू वह धैर्य है
जो हर मुश्किल को ,
मुस्कान में बदल देता है।
कभी कभी
हम बड़े हो जाते है। दूर चले जाते है
अपनी दुनिया में खो जाते है।
माँ...
पर सच तो ये है
तेरी सीख त्रि छाया बन कर साथ चलती है।
माँ। ..तू सिर्फ एक रिश्ता नहीं,
तू जीवन का सब से पवित्र अनुभव है।
तू धरती हैजिस पर हम खड़े है।
तू आकाश है
जिस की और हम देखते है।
धतु वह शक्ति है जो हमे गिर करभी
फिर से उठना सीख़ती है।
तू ही अंत है.
तू ही आरम्भ है,
तू ही जीवन का स्तम्भ है।
और सच कहे तो--
पुरे संसार में ,
अगर कोई सब से सच्चा
सबसे पवित्र रिश्ता
और सबसे निस्वार्थ प्रेम है...
तो वो
सिर्फ माँ है----
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें